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नो व्हीकल डे के बीच मंत्री का 4 गाड़ियों वाला काफिला बना चर्चा का विषय, सवालों में सरकार का संदेश

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बिहार में एक तरफ मुख्यमंत्री और मंत्री नो व्हीकल डे मना रहे हैं, वहीं सरकार के एक मंत्री 4 गाड़ियों के काफिले के साथ दफ्तर पहुंचे। तस्वीरें वायरल होने के बाद सियासी बहस तेज हो गई है।

पटना/आलम की खबर:बिहार में इन दिनों “नो व्हीकल डे” को लेकर सरकार की ओर से बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी समेत कई मंत्री और अधिकारी लोगों को ईंधन बचाने तथा प्रदूषण कम करने का संदेश देने के लिए पैदल, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इसी बीच राज्य सरकार के एक मंत्री का चार गाड़ियों के काफिले के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचना अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद विपक्ष के साथ-साथ आम लोग भी सवाल उठाने लगे हैं कि जब सरकार खुद ईंधन बचाने की अपील कर रही है, तो उसके मंत्री इस संदेश का पालन कितनी गंभीरता से कर रहे हैं।

दरअसल, मामला लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से जुड़े बिहार सरकार के गन्ना उद्योग मंत्री का है। शुक्रवार को मंत्री अपने समर्थकों और सुरक्षा कर्मियों के साथ कई गाड़ियों के काफिले में पार्टी कार्यालय पहुंचे। उसी समय वहां मौजूद पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि एक तरफ मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री जनता को निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ मंत्री खुद कई गाड़ियों के साथ चल रहे हैं। इस सवाल के बाद मंत्री ने मीडिया के सामने सफाई दी और कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अपील का पूरा सम्मान करते हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती बनने वाला है, इसलिए सरकार जनता के बीच जागरूकता फैलाने का प्रयास कर रही है। मंत्री के अनुसार, “हम लोग प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी के संदेश का पालन कर रहे हैं। सरकार लगातार लोगों से अपील कर रही है कि वे ईंधन की बचत करें और प्रदूषण कम करने में सहयोग दें। यह अभियान केवल सरकार के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए जरूरी है।”

हालांकि मंत्री की सफाई के बावजूद सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस तेज हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि अगर सरकार सच में ईंधन बचाने को लेकर गंभीर है, तो मंत्रियों और नेताओं को सबसे पहले खुद उदाहरण पेश करना चाहिए। लोगों का कहना है कि आम जनता से त्याग और सादगी की अपील करने वाले जनप्रतिनिधियों को खुद भी उसी नियम का पालन करना चाहिए। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे “कथनी और करनी” का फर्क बताते हुए सरकार पर निशाना साधा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार द्वारा चलाया जा रहा “नो व्हीकल डे” अभियान केवल प्रतीकात्मक नहीं होना चाहिए। यदि मंत्री और अधिकारी खुद इस मुहिम को गंभीरता से अपनाएंगे, तभी आम जनता पर उसका सकारात्मक असर पड़ेगा। बिहार जैसे राज्य में जहां लगातार बढ़ता प्रदूषण और ट्रैफिक बड़ी समस्या बनते जा रहे हैं, वहां ऐसे अभियानों को व्यवहारिक रूप से लागू करना जरूरी माना जा रहा है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर कई बार अपील की है। इसी क्रम में बिहार सरकार ने भी एक दिन निजी वाहन का कम इस्तेमाल करने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की पहल शुरू की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं कई मौकों पर पैदल या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते नजर आए हैं। कुछ मंत्री ट्रेन और बस से यात्रा कर लोगों को संदेश देने की कोशिश कर चुके हैं। सरकार का दावा है कि यदि सप्ताह में एक दिन भी लोग निजी वाहनों का उपयोग कम करें तो पेट्रोल-डीजल की खपत में बड़ी कमी लाई जा सकती है।

लेकिन मंत्री के काफिले वाली घटना ने इस पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाते हुए कहा कि सरकार केवल फोटो और प्रचार तक सीमित है। विपक्ष का आरोप है कि एक ओर जनता को महंगे पेट्रोल-डीजल के बीच बचत की सलाह दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर वीआईपी संस्कृति खत्म होने का नाम नहीं ले रही। नेताओं के बड़े काफिले अब भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं।

इधर सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि मंत्रियों के साथ सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त वाहन चलते हैं और इसे अभियान से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। उनका तर्क है कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत कई बार अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की अलग-अलग गाड़ियां जरूरी होती हैं। हालांकि आम लोगों के बीच यह तर्क ज्यादा असरदार नहीं दिख रहा है।

इस पूरे मामले के बाद एक बार फिर बिहार में वीआईपी कल्चर बनाम सादगी की राजनीति पर चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सरकार को इस तरह के अभियानों को और गंभीरता से लागू करना होगा, ताकि जनता के बीच सही संदेश जाए। केवल अपील करने से नहीं, बल्कि खुद उदाहरण पेश करने से ही ऐसे अभियान सफल हो सकते हैं।

बिहार सरकार फिलहाल पर्यावरण संरक्षण, ईंधन बचत और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान चला रही है। स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी विभागों में भी इसको लेकर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लेकिन मंत्री के काफिले की तस्वीरें सामने आने के बाद यह सवाल जरूर उठने लगा है कि क्या सरकार के सभी लोग इस मुहिम को समान रूप से गंभीरता से ले रहे हैं या नहीं।

अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और क्या मंत्रीगण खुद भी “नो व्हीकल डे” अभियान का अधिक सख्ती से पालन करते नजर आएंगे। फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।

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